छोटे समूह का टूलबॉक्स: पवित्र आत्मा की सुनना
सारांश: तीस सेकंड या एक मिनट की चुप्पी से पता चलता है कि हम पवित्र आत्मा की बात को अहमियत देते हैं।
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सारांश: तीस सेकंड या एक मिनट तक चुप रहने से पता चलता है कि पवित्र आत्मा हमसे जो कहना चाहता है, उसे हम अहमियत देते हैं।
“टूलबॉक्स” ब्लॉग शृंखला में हम छोटे समूहों को चलाने से जुड़े कुछ आम सवालों के जवाब देंगे। अगर आपके मन में कोई सवाल है जिसका जवाब आप चाहते हैं, तो हमें संदेश भेजें!
मैं अपने छोटे समूह को पवित्र आत्मा की बात सुनने में कैसे मदद करूँ?
अपनी बैठक की शुरुआत में हम उस हफ़्ते पवित्र आत्मा की बात सुनने का कोई आसान-सा अनुभव बता सकते हैं। रोज़मर्रा की आम ज़िंदगी के अनुभव शायद “बताने लायक कहानी” न लगें। लेकिन ये रोज़ के पल पवित्र आत्मा की अगुवाई में जीने की चाह बढ़ाते हैं, क्योंकि उनसे पवित्र आत्मा हमारे लिए दूर नहीं, बल्कि करीब और सुलभ लगता है।
बैठक में जवाब देने के समय, हम चुप रहने के लिए जगह बना सकते हैं। तीस सेकंड या एक मिनट तक चुप रहने से पता चलता है कि पवित्र आत्मा हमसे जो कहना चाहता है, उसे हम अहमियत देते हैं। इन शांत पलों के बाद हमें आसान और छोटे शब्दों में यह बताने के लिए तैयार रहना चाहिए कि पवित्र आत्मा ने हमें किस बात का एहसास कराया। हम ऐसा जीवन जीने का उदाहरण देते हैं जो पवित्र आत्मा की बात सुनता है।
अगर मेरे छोटे समूह में कुछ लोग हर बात को बहुत ज़्यादा आत्मिक रंग देते हों, तो मैं क्या करूँ?
कुछ लोग पवित्र आत्मा के साथ अपने अनुभवों पर ज़ोर देकर छोटे समूह के दूसरों लोगों को डरा या दबा सकते हैं। जब वे अपना अनुभव बताएँ, तो हम अनुभव का जश्न मनाने के बजाय इस बात की खुशी मना सकते हैं कि उन्होंने पवित्र आत्मा की बात सुनी और उसके अनुसार चले। हम पूछ सकते हैं, “जब उसने आपको यह बात बताई, तो आपने पवित्र आत्मा के कहे पर कैसे अमल किया?” इस तरह हम समूह में उनकी भागीदारी को अहमियत देते हुए उन्हें अपने मूल्यों को और गहराई से समझने में मदद करते हैं।
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